मेरे देश की आबादी
मैं सोचता हूँ ! मैं अपने देश की समस्याओं के बारे सोचू और उन का
समाधान करने बारे उपाये ढुंढू !
मेरा देश सुख सुविधा से परिपूर्ण हो जाये कुछ ऐसे उपाये
हो जाये !मैं सोचता भी हूँ हर आयाम के बारे मगर मेरा हर उपाये जो
मैं देश की किसी भी समस्या बारे सोचता हूँ वो इतनी ज्यादा आबादी
के लिये कम पड़ जाता है !
देश जब से आजाद हुआ है एक चीज जो सदा से अब तक
बढ़ती रही है वो है आबादी !मुझे याद है !संजय गांधी के समय में
शायद आबादी 56 करोड़ थी !
कुछ उपाये किये गये थे आबादी को निरंतर में रखने के
लिये निचले या ऊपरी स्तर पर कुछ ज्यादतियां भी हो गई !लोग
कहने लगे आजाद देश में जबरदस्ती है !प्यार से लोगो को
समझाया जाये !प्यार से समझाते -समझाते यह 130 करोड़ हो गई
यह योजना के परिणाम तो जरूर बहुत अच्छे होते !
मगर उस समय इस योजना कारण जो हुआ बहुत बुरा हुआ !कैसे
हुआ क्यों हुआ इस पर बात नही !
अब कोई नेता या संस्था आबादी को निरन्तरित रखने की
योजना नही बनाता !कई योजनाये सुनने को तो मिली मगर आज तक
कोई लागू नही हुई अफ़सोस !
राजीव अर्पण
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