Thursday, 23 November 2023
Saturday, 1 June 2019
बस मेरा देश तरक्की कर
बस मेरा देश तरक्की करे
बस मेरा देश तरक्की करे महान आदमी आये और मेरे देश को
तरक्की की उचाईयों पे ले जाये बस इतना सा मेरा ख्वाब है यहां पर
मै अपनी कोई कहानी या विचार नहीं लिखू गा मै होता भी कौन हूँ
अपना सुझाव देने वाला मेरी कभी सुनी गई है या सुनी जाये गी
बस तमन्ना है की देश जहाँ मै पैदा हुआ हूँ वो हर बात
में दुनिया में टेक्नोलॉजी आदि में दुनिया से मुकाबला कर सके किसी
से पीछे ना रहे आगे ही रहे
राजीव अर्पण फ़िरोज़पुर शहर पंजाब
भारत
Wednesday, 15 November 2017
आखिर काला धन काला ही कैसे रह गया
- आखिर काला धन काला ही कैसे रह गया
- ज्यादा नहीं लिखू गा बस कुछ बाते काला धन वालो के हथकंडे हजारो थे
- पहला नोट बंदी के दौरान जो चार हजार बदलने की सुविधा थी कुछ कम्पनिया
- वालो ले लाखो करोड़ो रूपये बदलवा लिये तो काला धन वही अलमारियों में रहा
- दूसरा पट्रोल पन्पुम को जो 500 - 1000 रूपये लेने की छूट रही उन्होंने मालिकों या
- कर्मचारियों ने पैसे बदलने में सहाईता की तो यह भी काला उन्ही अलमारियों में रहा
- ऐसे बहुत से हथकंडे यह सब मेरी सच्ची और झूटी सोच पर आधारित है इसी लिये
- मैं ज्यादा हथकंडो बारे नहीं लिख रहा
- राजीव अर्पण फ़िरोज़पुर शहर पंजाब भारत
Thursday, 27 April 2017
जब किसी गीत ग़ज़ल रचना होती है तब मेरे अंदर सगीत समोहन ना जाने क्या -क्या
जब किसी गीत ग़ज़ल रचना होती है तब मेरे अंदर सगीत समोहन ना जाने क्या -क्या
जब कभी मुझे गीत या ग़ज़ल उतरती है यहां उतरती इस लिये लिख रहा हूँ मै कोई
पेशे के लिये या किसी ने मुझे कोई मजमून दिया हो उस पर कुछ किताबे या उस विषय
से सबंधित जानकारी हांसिल कर के बहुत मेहनत से तो लिखता नहीं की मुझे मेरा मेहनताना
मिले इतने सालो से लिखते -लिखते बैसे तो यह सब बहुत आसानी से कर सकता हूँ मगर
किया कम ही है हा कुछ दोस्तों के लिये लिखना पड़ा जिन्हे लिखना लाजमी सा था
उन से सब पूछा हा आप को कहा किस बारे लिखना है उनसे एक दो दिन का
समय लिया ओर जब मुझे मसूस हुआ की अब लिख सकता हूँ तो एक बार मे ही उन्हें
लिख कर दे दिया ओर कहा भाई इससे अपनी मर्जी से ठीक ओर अच्छा कर लो
कुछ दोस्तों ने मुझे बताया दोस्त हमने बहुत कोशिश की रातो भर दिन भर तुम्हारे लिखे
को अच्छा करने की मगर वो तो ओर खराब होता गया किरपा इस मे हमारे कहने कुछ
ओर जोड़ दीजिए जो रह गया है या कुछ निकाल दीजिये तो दोस्तों के लिये यह सब करना ही
पड़ा
मगर मै बात कर रहा था जब कभी मेरे पे कोई गीत ग़ज़ल उतरती है तो एक अजीब सा नशा
होने लगता है जो मुझे लिखने के लिये बिब्श कर देता है या सम्मोहित कर देता है मै लिखने
लगता हूँ तब मेरे गीत ग़ज़ल मैं सरगम संगीत एक मदमस्त खशबू ना जाने क्या क्या होता है
मेरे लिये तो अलग ही जहाँन होता है ओर उन पलो मे पल बहुत बड़े हो मेरे लिये तो वो रात दिन
पलो मे ही गुजरती है
राजीव अर्पण फ़िरोज़पुर शहर पंजाब भारत
Thursday, 2 March 2017
मेरी लेखनी मैं ही सभी कदारो का रोल निभाता हूँ
मेरी लेखनी मैं ही सभी कदारो का रोल निभाता हूँ
मैने बहुत छोटी आयु में लिखना शुरू कर दिया था लगभग 14 -15 साल का था
ना समझ पर तब भी मुझे लिखने की आवंद आती थी मैं बहुत सी टूटी फूटी काव्य मे
लाइने लिखता था मगर उन सब मे कुछ लाइने ऐसी लिख जाता था जो बहुत मझे
विचारक लेखक की उन को सुन कर बड़े से बड़े लेखक हैरान हो जाते थे
मैं लिखता रहा और कुछ साफ सुथरा लिखने लगा तब मेरे बहुत से लेखक
दोस्तों ने कहा भाई आप लिखते जाते हो कभी महान लेखको को पड़ भी लिया करो
तब मेने पड़ना शुरू किया किसी महान लेखक की किताब नही छोड़ी जो जो मिलता गया
बस फिर पड़ता ही चला गया सालो साल मेने दिन रात हर छोटे बड़े लिखक विचारक
दार्शनिक और धर्म समाजिक सभी प्रकार की किताबे पड़ दी जो जो हिंदी या पंजाबी
मैं ट्रांसलेट हुई थी
मेरे अपनी लेखनी वैसी ही रखी मैं अपनी हर लेखनी मे हर पात्र लगभग खुद को
ही बनाता दूसरे को पात्र बनाने का मेरा हक भी कहा था बस मैं लिखता ही चला गया बहुत
सी पाडुलिप्या सालो से पड़ी -पड़ी सड़ गल गई बहुत सी छप भी गई और समय के साथ
लुप्त भी हो गई
राजीव अर्पण
Wednesday, 8 February 2017
मेरे देश को चाहिये कम आबादी ताकि देश सभी को सब सुविधाये दे
मेरे देश को चाहिये कम आबादी ताकि देश सभी को सब सुविधाये दे
हाँ मेरे देश को चाहिए कम आबादी ता को सभी नागरिको को देश सभी सुविधाये
देने में सामर्थ हो सके
राजीव अर्पण फ़िरोज़पुर शहर
पंजाब भारत
मेरे देश को चाहिए ज्यादा जमीन समुंदर उच्चतम तकनीक के लिये नोकरिया बस
मेरे देश को चाहिए ज्यादा जमीन समुंदर उच्चतम तकनीक के लिये नोकरिया बस
मेरे देश को चाहिए ज्यादा जमीन और ज्यादा समुंदर उच्चतम तकनीक के लिये
नोकरिया और वेतन बाकी मेरे देश के नागरिक स्वयं से कर ले गे सब कुछ स्वयं से हो
जाये गया
राजीव अर्पण फिरोजपुर शहर
पंजाब भारत
Friday, 27 January 2017
इतने विचार दर्शन मेरे दिल दिमाग मे क्यों
इतने विचार दर्शन मेरे दिल दिमाग मे क्यों
ना मैं कोई स्थापिक लेखक ,विचारक या नेता हूँ ना ही कुछ बनने की चाहत है
ना ही कभी मैने विचारक या लेखक बनने के लिये बहुत मेहनत की है
हाँ जवानी मे कुछ लिखने या कुछ बनने के ख्वाव जरूर देखे होंगे
अब तो इतने विचार मेरे दिलो -दिमाग पर छा जाते है की मैं लिखने को मजबूर
हो जाता हूँ
सीधा लेपटॉप पे हूँ पता नही क्या लिखने जा रहा हूँ कोई तैयार नही
किया हुआ
जो मेरे देश दुनिया मे हो रहा है जिन -जिन विचारो दर्शन की देश दुनिया
मे आज कल दुहाई दी जा रही है उनका ही असर मेरे दिल दिमाग मे होना सोभाभिक
ही है
बहुत सारे दार्शनिको विचारको बहुत गभीरता से पड़ा है उस पे अपना विचार
किया है
बहुत सारे विचारको दार्शनिको को देख और सुन रहा हूँ बहुत से देशो की व्यवस्था
कारिया प्रणाली वा भौतिक वा आर्थिक स्थितयों के बारे मे जानता हूँ
तो यह सोभाविक है उनसब को दिमाग मे होते हुये मेरे दिमाग मे भी कुछ विचार
दर्शन आये गे ही वो सब जब हो जाता है तो मे लिखने को मजबूर हो जाता हूँ
बहुत बार मैं लिखता ही नही खुद को समझा बुझा लेता हूँ मेरे लिखने से क्या होने
वाला है मैं हूँ कोन एक छोटा सा सहिमा सा टुटा फूटा सा कवि लेखक या वो भी नही
मगर फिर भी देखता कैसे कैसे लोग कैसे कैसे विचारो से देश दुनिया को चला रहे
सोचता हूँ ऐसे मे इन सब का इंजाम क्या होने वाला है
और मेरी इतनी उम्र मे क्या क्या इंजाम निकले है उन सब के आधार पर आगे क्या
होगा इस सब का पूरा पूरा नही तो कुछ इंदाजा तो लग ही रहा है
क्या सब जो यह कह रहे है समान अधिकार लोकतंत्र संपूर्ण आजादी यह सब कहने
मे ही है या सच मे है
मेरी समझ मे यह सब कहने मे है सच मे नही
मे एक एक बात पर बहुत विस्तार से लिख सकता हूँ मगर सुनता ही कोन है मे यह जालिम
जमाने मे इतने प्रभाव शाली वा बाहुबली धनाड़ीया लोगो मे मेरी औकात ही क्या है जो मैं कुछ
कह सकू
बस अर्पण ठीक है यह आधा अधूरा लेख
तेरे भाग्य जो तूने स्वयं लिख रखा है दर्दीले गीत लिखना और दर्द हांड़ना अपने साथ
अपने दर्शन और विचारो को लपेट के मर जाना
राजीव अर्पण फ़िरोज़पुर शहर पंजाब भारत
Thursday, 8 December 2016
मैने वो सामने वालो की स्वीटी नाम की कुतिया से क्या लेना था
मैने वो सामने वालो की स्वीटी नाम की कुतिया से क्या लेना था
मैं मुश्किल से दो साल का था मुझे याद है यह सीन जब रात १२ बजे
मैं रोने लगा और मैं बहुत ज्यादा जीद करने लगा की मैंने सामने घर
वालो की कुतिया स्वीटी देखनी है मुझे इतना भी याद है कि उसने
दो-चार दिन हुये थे उसने पिलो को जन्म दिया था
मेरी जीद के आगे घर वालो को झुकना पड़ा और मेरी दादी
ने रात को उनका दरवाजा खुलवाया और मुझे स्वीटी के दर्शन करवाये
मुझे वो जगह स्वीटी की शक्ल अच्छी तरह याद है
मगर आज तक मुझे यह नही समझ मे आया मैं उसे देखना क्यू
चाहता था
साथ मे एक और बचपन की याद जीद कर के रोने लगता था
और रोते -रोते भूल जाता था मैं रो किस लिये रहा हूँ
राजीव अर्पण फ़िरोज़पुर शहर पंजाब
भारत
फिर भी हम क्यू जीये जाते है
- फिर भी हम क्यू जीये जाते है
- हिन्दू मान्त्य के अनुसार हम मर कर नया जन्म लेते है !
- अगर यह सत्य है तो हम बुढे हों जाने पर जब हमारे पास
- शरीरक तोर पर ना आंत ना दांत कुछ भी नही रहता है
- कुछ कर भी नही सकते चल नही सकते बैठ नही सकते
- इस सब के विपरीत बहुत सारी बीमारियों तथा कष्टो से
- घीर जाते है बहुत मुश्किल से हम जीते है
- जब हमे पता है हमारा नया जन्म होगा हम दोबारा
- से जन्म लेंगे फिर से जीना शुरू होगा नया होगा इस से
- बेहतर होगा तो फिर क्यू हम इसी जीवन से चिपके रहते
- है और जीने की तमन्ना रखते है हम नये मे जाने से क्यू
- डरते है बस हम जीये जाते है
- राजीव अर्पण
Wednesday, 21 September 2016
KUCHH BATE ANKHI: मृग तृष्णा
KUCHH BATE ANKHI: मृग तृष्णा: मृग तृष्णा मृग तृष्णा सबने सुना है ,सुना है ना यह क्या करती है !मैंने देखा है आने वाले पलों के लिये तो यह ख्वाब बना...
मृग तृष्णा
मृग तृष्णा
मृग तृष्णा सबने सुना है ,सुना है ना यह क्या करती है !मैंने देखा है
आने वाले पलों के लिये तो यह ख्वाब बनाती ही है इंसान को सताती
ही है
अफ़सोस तो इस बात का है की यह गुजरे हुये अच्छे से अच्छे पलों
को भी नही छोड़ती उन मे भी यह तृष्णा बनी रहती है की जो हुआ वो
थोड़ा सा ज्यादा होना चाहिये था !जब की जो हो गया उस मे कोई बदलाव
नही हो सकता फिर भी तृष्णा ना जाने क्यों उलझाये रखती है
मेरा घर थोड़ा सा ऐसा देश ऐसा होता दोस्त ऐसे होते बाबा यह कही
नही छोड़ती मुझे क्या इस ने बडो -बड़ो को मुर्ख बनाया क्या आप को नही बनाती
राजीव अर्पण फ़िरोज़पुर शहर पंजाब भारत
Tuesday, 20 September 2016
अब तो लिखते हुये डर लगता है
अब तो लिखते हुये डर लगता है
मेरे देश मैं सुना है ऐसे हालात है की लिखते से पहले किसी वकील की सलाह
ले लो
जो मैंने लिखा है ठीक है कोई केस तो नही बनता
परन्तु कहा जाता फिरू वकील के पास मैंने तो सीधा लैपटॉप पर ही लिखा है
ओह बस करू कही इस पर ही ना केस बन जाये
Wednesday, 17 December 2014
शोआध का विषय
शोआध का विषय
नई -नई खोजे हो रही है !मनुष्य के प्रत्येक अंग पे ,उन अंगो में विकार
या शरीर में आ जाने वाली बीमारियो से निजात पाने के लिये अनेक
ओषदिया विकसित हो रही है !उन सभी अविशारको को मेरा शत-शत
प्रणाम !
इन में से बहुत ज्यादा ओषदिया हमारे खून में मिलकर किसी भी रोग
को खत्म करने की प्रतिरोध क्षमता इतनी बढ़ा देती है कि वह रोग
समाप्त हो जाता है !विस्तार से इस बारे अगर मै लिखू तो बहुत ज्यादा
हो जाये गा !
मै लिखता हूँ बस थोड़ा सा प्रतिशोधक क्षमता बारे जो हमारे शरीर
सदा मजूद होती है कभी -कभी यह क्षमता स्वय से इतनी बड़ जाती है
कि रोग स्वय से समाप्त हो जाता है !
वैसे प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने या जागृत करने की अनेको -अनेक
विधियों से किसी की मै चर्चा नही करू गा हर विधि पर लाखो पुस्तके
लिखी जा चुकी है !
मै तो बस इतना कहना चाहता हूँ बर्षो से लगा रोग स्वय से प्रतिरोधक
क्षमता जाग जाने से एकाएक समाप्त हो जाता है !
मै ऐसे अनेक व्यक्तियों को जनता हूँ जो अपने रोग का बहुत विधियों
से बहुत सी जगहों से बहुत सालो तक उपचार करनवाने के बाद इस लिये
थक -हार कर बैठ गये क्यों की वह रोग कही से ठीक नही हुआ !
फिर अचानक से एकाएक उन का रोग स्वय से समाप्त हो गया
आखिर क्यों और कैसे यह हुआ है तो यह शोयध का विषय !
राजीव अर्पण फिरोज़पुर शहर पंजाब
भारत
Saturday, 6 December 2014
मेरे देश की आबादी
मेरे देश की आबादी
मैं सोचता हूँ ! मैं अपने देश की समस्याओं के बारे सोचू और उन का
समाधान करने बारे उपाये ढुंढू !
मेरा देश सुख सुविधा से परिपूर्ण हो जाये कुछ ऐसे उपाये
हो जाये !मैं सोचता भी हूँ हर आयाम के बारे मगर मेरा हर उपाये जो
मैं देश की किसी भी समस्या बारे सोचता हूँ वो इतनी ज्यादा आबादी
के लिये कम पड़ जाता है !
देश जब से आजाद हुआ है एक चीज जो सदा से अब तक
बढ़ती रही है वो है आबादी !मुझे याद है !संजय गांधी के समय में
शायद आबादी 56 करोड़ थी !
कुछ उपाये किये गये थे आबादी को निरंतर में रखने के
लिये निचले या ऊपरी स्तर पर कुछ ज्यादतियां भी हो गई !लोग
कहने लगे आजाद देश में जबरदस्ती है !प्यार से लोगो को
समझाया जाये !प्यार से समझाते -समझाते यह 130 करोड़ हो गई
यह योजना के परिणाम तो जरूर बहुत अच्छे होते !
मगर उस समय इस योजना कारण जो हुआ बहुत बुरा हुआ !कैसे
हुआ क्यों हुआ इस पर बात नही !
अब कोई नेता या संस्था आबादी को निरन्तरित रखने की
योजना नही बनाता !कई योजनाये सुनने को तो मिली मगर आज तक
कोई लागू नही हुई अफ़सोस !
राजीव अर्पण
Friday, 8 August 2014
हीरे और दूध का कारोबार
हीरे और दूध का कारोबार
मेरे लड़के ने बेल्जियम जाना था !मेरा दोस्त मेरे घर के नजदीक ही अंग्रेजी दवाईयो की
दुकान चलता है
मेरा लड़का किसी काम से बाजार गया वह मेरे दोस्त से भी मिला !उसने मेरे लड़के
से कहा बेल्जियम में हीरे का दूध का बहुत बड़ा कारोबार है!
मेरा लड़का जो बेल्जियम टयोटा मोटर में सॉफ्टवेयर इंजीनयर के पद पर टयोटा कार
में जी,पी ,एस सिस्टम लगाने जा रहा था ओर वहा रहने की जगह उस ने स्वय डुड्नी थी
इस लिये हड़वड़ाहट में था !
मेरा लड़का मुझ से आ के कहने लगा पापा आपको पता नही हीरे का दूध का बेल्जियम
में बहुत बड़ा कारोबार है आप हीरे से मिले हीरा नाम का व्यक्ती हमारे मोहल्ले में ही रहता हे
मेने उस भद्र आदमी से मिला ओर पूछा आप का बेल्जियम में दूध का व्यापार है वो मुझे
बहुत हैरानी से देखने लगा और सोचते हुये कहने लगा मेरा तो कोई काम नही किसी और
हीरा नाम का कोई और आदमी होगा !
मेने अपने दवाईयो की दुकान वाले दोस्त से पूछा उस ने स्पष्ट किया की मैने कहा था
बेल्जियम में दूध तथा हीरे का बहूत कारोबार है !
राजीव अर्पण
Thursday, 7 August 2014
लोअर लिप्स
लोअर लिप्स
मुझे मेरी एक पुरानी सहेली मिली मैने पूछा सज-सँवर के कहा से आ रही हो
वह बोली हम लड़कियों को सौ मुसीबते बयूटी पारले गई थी वह से
उप्पर लिप्स आदि करवा के आ रही हूँ !
मैने पूछा यह उप्पर लिप्स क्या होते है ! वो बोली ऊपर के होठो के ऊपर
जो वाल होते है उसे कहते है उन्हें साफ करवा के आई हूँ तथा एक दो ओर
काम !
मैने कहा लोअर लिप्स भी साफ करवा आती !
वह बोली मेरे नीचे के होठ के नीचे तो वाल नही है मैने नीचे के होठ के
दो फीट नीचे वाल है ना वो लोअर लिप्स !
वह सोचने और समझ गई ! बोली वो तो खुद ही साफ करने पड़ते है
मेरी ब्यूटीशन यह नही करती मै भी किसी से करवाने से लजाती हूँ
राजीव अर्पण
Tuesday, 5 August 2014
हीर की तकदीर
हीर की तकदीर
वो कमसिन नाजुक सी अति सुन्दर लड़की जिस ने एक हम उम्र भोली सी सूरत
वाले लड़के से प्यार किया ओर उसे दिलो-जान से चाहने लगी
जवानी के गरूर में प्यार के हसीन सपने बुनने लगी प्यारी सी हसीन
जिंदगी जीने का खूबसूरत ख्वाब उसके दिल में पलने लगा उसने अपने प्रेमी के
संग जिंदगी भर जीने का खाका तैयार कर लिया
एक दिन उसके प्रेमी ने उसे अपने घर बुलाया
वो सपनो की गठड़ी सिर पे रखे अपने प्रेमी से मिलने उस के घर चली
गई
वहा क्या हुआ इस का जिक्र ज्यादा नही करता हुआ बस यही बताता हूँ
वहाँ उस के प्रेमी वा उस के चार-पांच दोस्तों ने उस के साथ दिन भर संभोग
किया बस आगे क्या लिखू बस
राजीव अर्पण
मेडिकल साईस से बाहर
मेडिकल साईस से बाहर
मेरे एक दाँत में दर्द था मैं डाक्टर के पास गया डाक्टर ने एन्टीक बोटिक दवाईया दी
और बोला यह दाँत निकलवाना पड़े गा यह खोखला हो चूका है
मेरे एक दोस्त ने मुझ से कहा जवानी में ही दाँत निकलवाने शुरू कर दो गे
तो साथ वाले दाँत भी कमजोर हो जाये गे
बहुत दर्द सहन किया मेने मै बहुत लोगो के पास भी गया आखिर मेरा एक दोस्त
एक आदमी के पास ले कर गया जो एक दुकान पर मुनीम का काम करता था वो चारपाई
पर बैठा काम कर रहा था
मेने उसे अपने दाँत के दर्द के बारे बताया वो दुकान से एक लकड़ी ले कर आया
और मुझे वो दर्द करता हुआ दाँत पकड़ने को कहा उसने एक कागज पर कुछ लिखा
और उस लकड़ी में उसे ठोक दिया मेरे दाँत का दर्द गयाब मैं बहुत हैरान हुआ इतने दिनों से बहुत
स्ट्रांग दवाईया ले रहा था दर्द नही जा रहा था
वह दाँत जिन्दगी भर नही दर्द किया
ऐसे ही मैं काफी लोगो को जनता हू जो पेट ,गला आधे सिर का दर्द तथा और बहुत सी
बीमारिया ठीक कर देते है मेने स्वय से आजमाया है
डाक्टरों से भी मेने यह बात की उन्हों ने भी कहा हाँ हमने भी यह सब बीमारी
दूर होती देखी हम से भी कई लोग बीमारी ठीक करवा के मिले है
मगर यह मेडिकल साईस से बाहर की बात है यह मेडिकल साईस में नही आता
राजीव अर्पण
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